कागजों में पूरे, धरातल पर अधूरे? – आवास पंचायत में बिल-वाउचर से लेकर पीएम आवास की पात्रता तक जांच की मांग

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◆ग्राम पंचायत आवास में विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप, कलेक्टर से जनसुनवाई में लगाई शिकायत

करैरा। ग्राम पंचायत आवास में पंचायत द्वारा कराए गए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता और नियमविरुद्ध लाभ दिए जाने के आरोप लगाते हुए ग्राम आवास निवासी विवेक रायकरवार ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर संबंधित अभिलेखों की जांच और मौके पर भौतिक सत्यापन कराने का आग्रह किया है। आवेदन की प्रति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत के कुछ विकास कार्यों में अभिलेखों और ऑनलाइन पोर्टल पर राशि का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि संबंधित कार्य धरातल पर अपेक्षित गुणवत्ता एवं मात्रा के अनुरूप नहीं किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने सीसी रोड, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, चेकडैम, तालाब, हैंडपंप से संबंधित कार्य, कुआं निर्माण, चौपाल/चबूतरा, बाउंड्रीवाल, कुड़ादान, श्मशान एवं साफ-सफाई सहित विभिन्न कार्यों की जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान, जियो-टैग फोटो तथा कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र का मिलान कराने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन होने पर कथित अनियमितताओं की वास्तविकता सामने आ सकती है।

*प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रता की जांच की मांग*

शिकायत में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभ लेने वाले हितग्राहियों की पात्रता की दोबारा जांच की मांग भी की गई है। आवेदन के अनुसार ऐसे व्यक्तियों की पात्रता की जांच की जाए, जिनके नाम पर पूर्व से भूमि दर्ज होने तथा लगभग एक एकड़ अथवा करीब 5 बीघा या उससे अधिक भूमि होने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति योजना के निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार अपात्र पाया जाता है तो संबंधित हितग्राही और लाभ स्वीकृत कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

*बिल और भुगतान रिकॉर्ड के मिलान पर जोर*

शिकायतकर्ता ने पंचायत वर्ष के उपलब्ध अभिलेखों, कैशबुक, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका तथा बैंक भुगतान रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराने की मांग की है। साथ ही स्वतंत्र तकनीकी अधिकारी से मौके पर आवश्यक माप लेकर अभिलेखों में दर्ज मात्रा और वास्तविक मात्रा का तुलनात्मक परीक्षण कराने का आग्रह किया गया है।

*मूल अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग*

आवेदन में जांच शुरू होने के साथ ही पंचायत की कैशबुक, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान रिकॉर्ड, जियो-टैग फोटो तथा पीएमएवाई-जी के मूल अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान दस्तावेजों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर बिना जांच आरोप लगाना नहीं है, बल्कि उपलब्ध जानकारी और धरातलीय परिस्थितियों के आधार पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका की निष्पक्ष जांच कराना है। आवेदन में समयबद्ध जांच की मांग करते हुए 7 दिन में मूल एवं डिजिटल अभिलेख सुरक्षित करने, 15 दिन में मौके का प्रथम भौतिक निरीक्षण और 30 दिन में प्राथमिक निष्कर्ष की लिखित सूचना देने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

*रिकॉर्ड और धरातल की स्थिति का होगा मिलान, तकनीकी जांच की मांग*

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए। इसके लिए स्वतंत्र तकनीकी अधिकारी से निर्माण कार्यों की माप कराकर माप पुस्तिका में दर्ज विवरण से उसका मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि सीसी रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट, चेकडैम, तालाब, कुआं, बाउंड्रीवाल, चबूतरा और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता एवं वास्तविक मात्रा की जांच होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही संबंधित कार्यों में इस्तेमाल सामग्री की खरीदी के बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की गई है।

*कैशबुक से बैंक भुगतान तक खंगालने की मांग, 30 दिन में रिपोर्ट का आग्रह*

आवेदन में पंचायत की कैशबुक, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान रिकॉर्ड, जियो-टैग फोटो और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मूल अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने का आग्रह किया है। प्रस्ताव में सात दिन में अभिलेख सुरक्षित करने, 15 दिन में मौके का प्रथम भौतिक निरीक्षण कराने तथा 30 दिन में प्राथमिक निष्कर्ष की लिखित जानकारी देने की मांग रखी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होने पर आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

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