दिनारा तालाब बना बच्चों के लिए खतरे की घंटी, 15 लीटर के प्लास्टिक डिब्बों” के सहारे मौत से खेल रहे मासूम

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गौ सेवक कल्लू महाराज ने प्रशासन से लगाई सुरक्षा बढ़ाने की गुहार, अभिभावकों से भी की सतर्क रहने की अपील

करेरा। दिनारा स्थित विशाल तालाब इन दिनों बच्चों के लिए मनोरंजन का नहीं, बल्कि बड़े खतरे का केंद्र बनता जा रहा है। गर्मी बढ़ते ही प्रतिदिन दर्जनों छोटे-छोटे बच्चे तालाब में नहाने और तैरना सीखने पहुंच रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि कई बच्चे अपनी कमर में 10 से 15 लीटर के खाली प्लास्टिक डिब्बे बांधकर गहरे पानी में उतर रहे हैं। यह नजारा देखने वालों की सांसें रोक देता है, क्योंकि बच्चों को न तो तैरना सही तरीके से आता है और न ही उन्हें पानी की गहराई का अंदाजा होता है।
स्थानीय समाजसेवी एवं गौ सेवक कल्लू महाराज ने इस गंभीर मामले को लेकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि “बच्चे खेल-खेल में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। यदि किसी दिन प्लास्टिक का डिब्बा कमर से खुल गया या संतुलन बिगड़ गया, तो बड़ा हादसा होने में देर नहीं लगेगी। पानी मजाक नहीं होता, पानी से कभी कोई जीत नहीं पाया।”
कल्लू महाराज ने कहा कि दिनारा तालाब क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। न तो वहां चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही किसी प्रकार की निगरानी दिखाई देती है। कई बार छोटे बच्चे बिना किसी बड़े की मौजूदगी के तालाब में उतर जाते हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा हो जाए तो तुरंत बचाव करना भी मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से संयुक्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि तालाब के आसपास सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग की जाए और बच्चों को तालाब से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों पर नजर रखें और यह जानें कि उनका बच्चा कहां जा रहा है।
ग्रामीणों का भी कहना है कि गर्मी की छुट्टियों में बच्चे समूह बनाकर तालाब पहुंचते हैं और घंटों पानी में रहते हैं। कई बच्चे केवल दूसरे बच्चों को देखकर गहरे पानी में उतर जाते हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
दिनारा तालाब शिवपुरी जिले के बड़े तालाबों में गिना जाता है और इसकी गहराई कई स्थानों पर काफी अधिक है। ऐसे में बच्चों का बिना सुरक्षा उपकरण और बिना प्रशिक्षक के पानी में उतरना सीधे खतरे को न्योता देना है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो किसी दिन यह लापरवाही मासूम जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

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