करैरा। नगर में जैन समाज द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री श्री 1008 ऋषभदेव (आदिनाथ) का पावन जन्म कल्याण महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला और बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए विधानाचार्य एवं मार्गदर्शक ब्रह्मचारी अंशू भैया कोलारस ने बताया कि जैन धर्म अनादि काल से चला आ रहा है।

चतुर्थ काल में लाखों वर्ष पहले जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ था, जिन्हें ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है। उनके दो पुत्र भरत और बाहुबली हुए थे। भरत चक्रवर्ती के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत पड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह से ही हो गई थी। सबसे पहले मंदिर जी में भगवान की पूजा और अभिषेक किया गया। इसके बाद सुबह लगभग 10 बजे भगवान की भव्य रथयात्रा निकाली गई।

रथयात्रा बड़े जैन मंदिर कृष्णा गंज से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई शिवपुरी रोड़ SBI के सामने हरिशरण जैन के निवास पर पहुंची जहां मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां सबसे पहले भगवान की 108 दीपों से दीप अर्चना की गई और भक्तामर पाठ किया गया। इसके बाद भगवान का 108 कलशों से अभिषेक, शांतिधारा और पूजन किया गया।

श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया।इस दौरान पुलिस सहायता केंद्र पर नगरवासियों के लिए प्रभावना वितरण और फल वितरण का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस सेवा कार्य में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान की रथयात्रा को वापस बड़े जैन मंदिर कृष्णा गंज लाया गया। यहां सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन रखा गया, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी लोगों ने भाग लिया।कार्यक्रम के अंतिम चरण में रात के समय भगवान की आरती और पालना कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया

पूरे दिन चले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस पूरे महोत्सव को सफल बनाने में आदर्श महिला मंडल, भक्ताम्बर महिला मंडल, जिनशासन एकता मंच, जैन युवा मंडल, जैन मिलन और महिला जैन मिलन का विशेष सहयोग रहा। जैन समाज के सभी लोगों ने मिलकर इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाया और भगवान श्री श्री 1008 आदिनाथ के जन्म कल्याण महोत्सव को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया।
