भोपाल। मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना में बड़ा बदलाव करने जा रही है मध्य प्रदेश की मोहन सरकार, विजन डॉक्यूमेंट-2047 के लक्ष्य को माना जा रहा बड़ी वजह… लाड़ली बहिना योजना: प्रदेश की 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों को और सशक्त बनाने के लिए मोहन सरकार नया प्लेटफार्म लेकर आ रही है। यह लाड़ली बहना योजना के तहत ही आएगा। इसमें बहनों को उद्योग धंधे लगाने में अतिरिक्त छूट मिलेगी। वे चाहेंगी तो उन्हें मासिक किस्त का एक मुश्त भुगतान किया जाएगा। रोजगार व स्वरोजगार में योग्यता के आधार पर अतिरिक्त छूट दी जाएगी। ये सभी बदलाव उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश के आधार पर होंगे।

दरसअल, मप्र से लेकर अन्य राज्यों में भाजपा और एनडीए को चुनाव में संजीवनी देने का मूल आधार मानी जा रही लाड़ली बहना योजना में मोहन सरकार पहली बार बड़ा बदलाव करने जा रही है। योजना के मूल स्वरूप में बदलाव किया जाएगा। यह काम महिला मंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति के सुझावों के आधार पर होगा। समिति बनाने पर पिछली कैबिनेट में सहमति बन चुकी है। ये होगी समिति
राज्य सरकार अब तक लागू की जा चुकी महिला सशक्तीकरण आधारित योजनाओं की समीक्षा करने जा रही है। यह काम महिलाओं और विशेषज्ञों को करना है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। मंत्री संपत्तिया उइके, मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी व राधा सिंह को शामिल किया जाएगा। समिति गठित करने संबंधी प्रस्ताव बनाया जा रहा है। यह समिति लाड़ली बहना योजना का सूक्ष्मतम अध्ययन करते हुए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करेगी। बदलाव की वजह है विजन डॉक्यूमेंट- 2047 के लक्ष्य
विजन डॉक्यूमेंट-2047 के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 2029 तक 27.7 लाख करोड़ और 2047 तक 250 लाख करोड़ करने का लक्ष्य है। अभी प्रति व्यक्ति आय 1.6 लाख है। इसे सरकार 2029 तक 3 लाख से अधिक और 2047 तक 22 लाख से अधिक करना चाहती है। सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि महिलाओं के आर्थिक रूप से संपन्न होने पर ही यह हो सकेगा। इसलिए उन्हें आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। यही वजह है कि सरकार महिला कल्याण और सशक्तीकरण से जुड़ी सभी योजनाओं (Ladli Behna Yojana) की समीक्षा करने जा रही है। इसमें मुख्य तौर पर लाड़ली बहना योजना भी है। योजना में ये बदलाव संभव
अभी 1500 रुपए प्रति माह दिए जा रहे हैं। यह राशि हर माह न देकर कुछ वर्षों की राशि एक मुश्त दी जा सकती है। ताकि यह उद्योग-धंधे लगाने में काम आए।
