नगर परिषद में फर्जी प्रस्ताव और रिकॉर्ड हेराफेरी का आरोप, दो महिला पार्षदों ने एसडीएम को सौंपा शिकायती पत्र

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◆अध्यक्ष पति के दबाव में काम कर रही है परिषद

करैरा । नगर परिषद करैरा में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का पर्दाफाश करते हुए वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद शालिनी सोनी तथा वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद खुशबू यादव ने गुरुवार को एसडीएम को अलग-अलग शिकायती आवेदन सौंपे। दोनों पार्षदों ने अपने आवेदनों में एक समान बिंदुओं का उल्लेख करते हुए फर्जी प्रस्ताव पारित करने, बैठक कार्यवाही में हेराफेरी करने, रजिस्टरों को छिपाने और अध्यक्ष पति के दबाव की गंभीर शिकायतें दर्ज की हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


शालिनी सोनी और खुशबू यादव ने आवेदनों में बताया कि हालिया नगर परिषद बैठक में बजट संबंधी प्रस्ताव तथा एफडीआर वापसी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित दिखाया गया, जबकि दोनों ने इनका खुलकर विरोध किया था। शालिनी सोनी ने स्पष्ट किया कि वे बैठक में मौजूद थीं और प्रस्ताव रजिस्टर में अपनी असहमति दर्ज की। तत्कालीन सीएमओ ने कार्यभार का हवाला देकर टिप्पणी बाद में लिखने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में उनकी असहमति को नजरअंदाज कर फर्जी सर्वसम्मति दर्शाई गई। खुशबू यादव ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा कि यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। दोनों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
पार्षदों ने नगर परिषद अधिनियम 1961 की धारा 19 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बैठक की कार्यवाही उसी दिन रजिस्टर में अंकित करना बाध्यकारी है, मगर करैरा में यह नियम कभी नहीं माना जाता। कार्यवाही रजिस्टर मांगने पर हमेशा बहाना बनाया जाता है कि वह अध्यक्ष महोदय के घर पर है। यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो गई है। आवेदनों में पीआईसी बैठकें समय पर न होने और इनकी कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित रहने का जिक्र है। अध्यक्ष पति के दबाव में पीआईसी रजिस्टर किसी को दिखाने की इजाजत नहीं दी जाती। कैश बुक, परिषद कार्यवाही रजिस्टर, खपत रजिस्टर, स्टोर रजिस्टर सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जनप्रतिनिधियों व जनता से छिपाए जाते हैं। मांगने पर यही जवाब मिलता है कि रजिस्टर अध्यक्ष पति के निवास पर हैं। इससे जनता का वैधानिक अधिकार छीना जा रहा है। दोनों पार्षदों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के दुरुपयोग पर भी सवाल उठाए। आरटीआई आवेदन दाखिल करने के बावजूद समय पर कोई जानकारी नहीं दी जाती, जो जवाबदेही की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि ये तथ्य नगर परिषद में गहराते भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की तस्वीर पेश करते हैं। अध्यक्ष पति का अनुचित हस्तक्षेप प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर रहा है। शालिनी सोनी और खुशबू यादव ने एसडीएम से मांग की है कि सभी आरोपों की समयबद्ध व निष्पक्ष जांच कराई जाए। फर्जी प्रस्तावों, रजिस्टर हेराफेरी और अध्यक्ष पति की दखलंदाजी की पड़ताल के लिए स्वतंत्र जांच दल गठित हो। दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम 1961 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों तहत सख्त कार्रवाई की जाए। सभी रजिस्टरों को कार्यालय में रखना अनिवार्य किया जाए और जनप्रतिनिधियों को बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित हो। एसडीएम कार्यालय पहुंचकर दोनों पार्षदों ने आवेदन सौंपे और जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई। शालिनी सोनी ने कहा कि जनता के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। खुशबू यादव ने जोड़ा कि ऐसी अनियमितताएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं। दोनों पार्षदों का कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाएंगी। यह मामला करैरा की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां पारदर्शिता की मांग जोर पकड़ रही है।

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