उफनती नदी,टूटा रास्ता और खुले आसमान के नीचे ये अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीण

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करैरा। खैराघाट ग्राम पंचायत में पड़ने वाले कुम्हरपुरा और घोसीपुरा गाँव के मरणोपरांत अंतिम संस्कार के लिए शमशान न होने का दंश झेल रहे है।भारी बारिश के बीच,उफनती नदी के किनारे,कीचड़ और दलदल से भरे रास्ते पर गाँव वालों को अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।

रास्ता इतना खराब कि लकड़ी और कंडों से भरे दो-दो ट्रैक्टर कीचड़ में आज एक अंतिम संस्कार के दौरान धँस गए।

सोचिए क्या स्थिति होती होगी कि बगल में बहती नदी का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है,और ऊपर से आसमान से बरसते बादल जैसे मानो दुख में साथ दे रहे हों।न कोई पक्का रास्ता,न पुल। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे रास्ता बनाया, लकड़ियाँ खींचीं और अंतिम संस्कार पूरा किया।

जिनको हम जीवन भर सिर आँखों पर बिठाते हैं, जब उनका शरीर पंचतत्व में विलीन करने का समय आता है, तब हमें सम्मानजनक स्थान भी नसीब नहीं होता।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले कभी इस समस्या की ओर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। लोग वर्षों से पंचायत और अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, परंतु आज तक इस बुनियादी सुविधा की व्यवस्था नहीं हो सकी।

अंतिम संस्कार का स्थान केवल एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं होता  वह गांव की आस्था, परंपरा और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक होता है। जब किसी के जीवन की अंतिम यात्रा अपमान और कष्ट के बीच पूरी होती है, तो पूरा समाज शर्मसार होता है।

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