लोक गीत एवं भजन संध्या के साथ धूमधाम के साथ मनाया गया पूर्व न.प. अध्यक्ष का श्रद्धांजलि समारोह

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करैरा। सौरभ भार्गव पत्रकार की दादी एवं करैरा की पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रहीं राजकुमारी भार्गव का 103 वर्ष की आयु में निधन होने के उपरांत करैरा में एक अद्भुत, अनूठा और प्रेरणादायी श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसे परिवारजनों ने शोक नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया। दीर्घायु पूर्ण कर शतायु की प्राप्ति के बाद स्वर्गलोक गमन करने वाली राजकुमारी भार्गव के व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान और संघर्षपूर्ण जीवन को स्मरण करते हुए उनके पुत्र सुभाष भार्गव ने बताया कि उनकी माता ने जीवन के सभी सुख प्राप्त किए, उन्होंने पुत्र, नाती-पोते, परिवार, सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा सब कुछ देखा, ऐसे में उनका जाना दुःखद अवश्य है लेकिन वह एक पूर्ण और संतुष्ट जीवन जीकर गईं, इसलिए परिवार ने उन्हें आँसू नहीं बल्कि मुस्कान के साथ विदाई देने का संकल्प लिया। इसी भावना के साथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लोक गीत, भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्सव का स्वरूप दिया गया, जिसमें बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कलाकार कलाकार रामायणी यादव द्वारा प्रस्तुत किए गए लोक गीतों और भजनों ने पूरे वातावरण को

आध्यात्मिक और भावविभोर कर दिया। भजनों की स्वर लहरियों और बुंदेली लोक गीतों पर उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध नजर आया और हर किसी ने इस आयोजन को जीवन और मृत्यु के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश देने वाला बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकारगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं नगरवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में राजकुमारी भार्गव के कार्यकाल, उनके सामाजिक सरोकार, नगर विकास में योगदान और सरल स्वभाव को याद किया। करैरा में इस प्रकार पहली बार किसी श्रद्धांजलि कार्यक्रम को ‘श्रद्धांजलि उत्सव’ के रूप में मनाया गया, जिसे देखकर नगरवासियों में जिज्ञासा और चर्चा का विषय बना रहा। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसने यह संदेश दिया कि मृत्यु को भी गरिमा, सम्मान और उत्सव के भाव से स्वीकार किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में परिवारजनों ने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा जहां भी रहे, अपने आशीर्वाद से परिवार, समाज और नगर को सदैव मार्गदर्शन देती रहे। यह श्रद्धांजलि समारोह न केवल करैरा बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।

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