जब एक साथ अपने दूल्हों के गले मे वरमाला पहना कर 51 बेटियां ने लिए जीवन के सात फेरे तो जयकारों से गूंज पंडाल

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करेरा। विवाह पंचमी के पावन अवसर पर श्री बगीचा धाम क्षेत्र करैरा में बुधवार का दिन इतिहास बन गया। 7 दिन की श्रीमद्भागवत कथा के भव्य धार्मिक आयोजन के समापन पर आठवें दिन 51 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह बड़े पैमाने पर संपन हुआ। इस कार्यक्रम की सबसे अनोखी और भावुक करने वाली बात यह रही कि हर दूल्हा-दुल्हन के लिए 51 अलग-अलग स्टॉल तैयार किए गए, जिनमें उनका नया जीवन शुरू करने के लिए घर का पूरा सामान सजा हुआ था। इस आयोजन ने करैरा और क्षेत्रवासियों को एक संदेश दिया कि बेटी बोझ नहीं, बेटी पूरा घर होती है। यह सिर्फ शादी नहीं थी, समाज में एक नई सोच जगाने वाली मिसाल थी कि जब लोग साथ आते हैं, तो मदद से कई घर बस सकते हैं और जीवन बदल सकते हैं।

यह दृश्य अनोखा था। हर स्टॉल पर संबंधित दंपती का नाम लिखा था और उसमें डबल बेड, कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सोफा सेट, गैस स्टोव, बेडिंग, बर्तन, पढ़ें, जेवर, कपड़े, पूजा सामग्री और यहां तक कि घर की छोटी-छोटी जरूरतों तक सब शामिल था।

हर जाति-वर्गकी बेटियां एक ही मंडप में

इस सामूहिक विवाह की सबसे प्रेरणादायक झलक यह रही कि एक ही मंडप में हर जाति और हर वर्ग की 51 बेटियां साथ फेरे ले रही थीं। समिति ने महीनों पहले गांव-गांव घूमकर ऐसे परिवार चुने जिनके लिए विवाह आर्थिक दृष्टि से चुनौती था। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि जब समाज एक हो जाए तो

अमीर-गरीब, जाति-भेद जैसी दीवारें खत्म हो जाती हैं। कार्यक्रम में ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक रमेश खटीक, वृंदावन के प्रख्यात कथा बकता पंडित कृष्ण कांत त्रिपाठी ,बागेश्वर बालाजी के हजारों भक्त और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वरमाला के समय पूरा परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा। समिति ने सभी जोड़ों को एक जैसा महत्व दिया। किसी विशेष व्यक्ति या दंपत्ति के लिए अलग व्यवस्था नहीं थी, जिससे आयोजन में समानता, एकता और सामाजिक सम्मान की भावना मजबूत हुई

जब सामूहिक विदाई का समय आया तो 51 ट्रैक्टर तथा चार पहिया वाहन सामान से लदे एक साथ निकलने लगे, तो दृश्य ऐसा लगा जैसे एक एकही ही समय में 51 नए घर बस गए हों। हर ट्रैक्टर में दूल्हा-दुल्हन के साथ उनकी गृहस्थी जा रही थी। दूल्हे भी उत्साहित थे और उन्होंने कहा कि यह सामान उनकी नई जिंदगी को सम्मान और सुरक्षा देगा। मंदिर समिति से जुड़े और शादियों की जिम्मेदारी देख रहे उपदेश बोहरे ने कहा हमने दहेज नहीं दिया, हमने बेटियों को गृहस्थी सजाकर दी है। अब ससुराल में कोई कमी नहीं दिखेगी, कोई ताना नहीं मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन सिर्फ सामूहिक विवाह नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक असमानता को मिटाने का प्रयास है, ताकि गरीब परिवारों की बेटियां भी सम्मान के साथ जीवन शुरू कर सकें।

भंडारा और भजन संध्या

विवाह के बाद हजारों लोगों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अमित धुर्वे की भजन संध्या ने कार्यक्रम को और भावनात्मक और भक्ति-पूर्ण बना दिया। भजनों पर लोगों ने नृत्य कर खुशी मनाई और इस पल को जीवनभर के लिए यादगार बनाया। समिति ने घोषणा की कि यह आयोजन हर वर्ष और बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इस वर्ष 51 स्टॉलों से 51 घरों को बसाया गया, आने वाले वर्षों में और भी गरीब बेटियों योंको को नई जिंदगी दी जाएगी। विदाई के समय फूल बरसाए गाए, संगीत बजा, दूल्हा-दुल्हन खुशी और भावनाओं से भरे अपने-अपने घरों के

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