भूमाफियाओं से बचाने हेतु कीमती राजस्व भूमि का तत्काल सीमांकन व संरक्षण की मांग

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एसडीएम अनुराग निंगवाल से नगर परिषद के उपाध्यक्ष राजीव सिकरवार ने की शिकायत

करैरा। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष राजीव सिकरवार ने जनसुनवाई में शासकीय भूमि को लेकर एसडीएम अनुराग निंगवाल को एक शिकायती आवेदन दिया । उन्होंने आवेदन में बताया खसरा नंबर 1971 वाली कुल 2.8740 हेक्टेयर राजस्व एवं नजूल श्रेणी की बहुमूल्य जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की दिशा में आवेदन दिया गया है। सिकरवार ने अपने आवेदन में उल्लेख किया गया कि यह क्षेत्र नेशनल हाईवे 27 की सीमा से सटा हुआ है, जिसकी वजह से इसकी रणनीतिक एवं आर्थिक महत्वता कई गुना बढ़ जाती है। आवेदन के अनुसार, इस भूखंड का एक हिस्सा 0.200 हेक्टेयर ऑडिटोरियम निर्माण के उद्देश्य से पहले ही

आरक्षित रखा गया है, जबकि शेष भाग कन्या छात्रावास तथा अंबेडकर पार्क जैसी सामाजिक योजनाओं के लिए चिह्नित है। फिर भी, स्थानीय स्तर पर व्याप्त अशांति के बीच यह संपत्ति धीरे-धीरे संदिग्ध तत्वों द्वारा हड़पी जा रही प्रतीत होती है, जो न केवल सरकारी खजाने को गंभीर क्षति पहुंचा रही, बल्कि सार्वजनिक हितों को भी खतरे में डाल रही है उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में जारी निर्देशानुसार, प्रत्येक शहरी निकाय को एक भव्य गीता भवन स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने का माध्यम बनेगा। इसी संदर्भ में नगर परिषद करैरा ने कलेक्टर शिवपुरी को अलग से पत्र भेजा है, जिसमें उक्त सर्वे नंबर के अंतर्गत 0.6 हेक्टेयर क्षेत्र गीता भवन के लिए आवंटित करने का अनुरोध शामिल है। सिकरवार ने बताया कि शीघ्रातिशीघ्र इस पूरे भू-भाग का सटीक मापन एवं सीमाप्रदर्शन न कराया गया, तो भूमि माफिया तत्वों द्वारा की गई अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ती जाएंगी, जिससे राज्य की संपदा अनावश्यक विवादों में उलझ जाएगी। उनका तर्क है कि यह स्थान अपनी केंद्रीय स्थिति के कारण आदर्श है, जहां से विभिन्न कल्याणकारी पहलें आसानी से संचालित हो सकें। आवेदन में विशेष जोर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि सीमांकन के पश्चात तत्काल तारबाड़ी या मजबूत बाउंड्री वॉल स्थापित की जाए, जो न केवल अनधिकृत प्रवेश को रोक सकेगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं को सुरक्षित रखेगी। यह कदम जनहित को सर्वोपरि रखते हुए शासन की नीतियों को मजबूत बनाने का प्रयास है, क्योंकि ऐसी संपत्तियां सामुदायिक विकास का आधार होती हैं। प्रशासन को चाहिये तत्काल ऐसी भूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कर उस पर नागरिकों के हितो को ध्यान में रखकर कोई पार्क या पास में रह रही छात्रावासो में छात्राओं का भविष्य सुरक्षित रह सके ।

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