SPCDF द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर मनाया उत्सव,निकली रैली

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करेरा। आज 31 अक्टूबर 2025 को भारत के लौहपुरुष, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के शुभ अवसर पर सरदार पटेल सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (SPCDF – An Amul Venture) द्वारा मेहसाणा जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ दूधसागर नेशनल अमूल के करेरा अवशीतन के तत्वाधान में जन्म जयंती समारोह एवं सहकारिता संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दूध उत्पादक, महिलाएँ, युवा एवं सहकारी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सरदार पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर के की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने सरदार पटेलजी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्र भारत में सहकारिता की भावना को सामाजिक-आर्थिक एकता का सबसे सशक्त माध्यम बनाया।


सरदार पटेल जयंती – जिसे राष्ट्रीय एकता दिवस (Unity Day) के रूप में भी मनाया जाता है – जिसके अंतर्गत “रन फॉर यूनिटी” का आयोजन किया गया। इसमें शिवपुरी जिले के गाँवों से दुग्ध उत्पादकों, महिलाओ और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से सरदार पटेलजी के “एकता और सहकार” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।


माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण और माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के सहकारी क्षेत्र में एक नया अध्याय आरंभ हुआ है। इसी प्रेरणा से राष्ट्रीय स्तर पर सरदार पटेल सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (SPCDF) की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य देशभर के दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समिति के माध्यम से सहकारी ढाँचे से जोड़ना है ताकि दुग्ध उत्पादकों को दूध संग्रहण से लेकर वित्तरण तक एक मजबूत, पारदर्शी और सहकारी अमूल प्रणाली का लाभ मिल सके।
वर्तमान में SPCDF भारत के 20 विभिन्न राज्यों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जहाँ यह दुग्ध उत्पादकों को संगठित सहकारी ढाँचे से जोड़ने, ग्राम स्तर पर दुग्ध सहकारी समितियों के गठन को प्रोत्साहित करने और किसानों को आधुनिक डेयरी सेवाओं से लाभान्वित करने की दिशा में कार्यरत है। सरदार पटेल का मानना था कि “देश की सच्ची शक्ति गाँवों में बसती है, और बिना सहकार नहीं उद्धार” — और यही दर्शन आज SPCDF की कार्यप्रणाली की प्रेरणा है। SPCDF अमूल मॉडल की भावना को आधार बनाकर कार्य कर रहा है — जहाँ किसान स्वयं अपने उत्पाद के स्वामी हैं, और संगठन का प्रत्येक निर्णय लोकतांत्रिक एवं सहकारी सिद्धांतों पर आधारित होता है।
कार्यक्रम तहत दूध उत्पादकोंने ये तय किया की उनके गाँवों में ग्राम दूध सहकारी समिति का गठन किया जाए और उसे SPCDF से संबद्ध किया जाए, तो उन्हें अमूल से जुड़े दूध उत्पादको के तरह उन्हे अनेक लाभ प्राप्त होंगे — जैसे दूध का उचित और पारदर्शी मूल्य, चारा एवं पोषण संबंधी सहायता, पशु स्वास्थ्य सेवाएँ, प्रशिक्षण और वित्तरण से जुड़ी सभी सुविधाएँ। इस अवसर पर दुग्ध उत्पादकों ने बड़ी संख्या में भागीदारी कर इस पहल का स्वागत किया। समारोह के अंत में दूध उत्पादकोने ये संकल्प लिया की वे हर गाँव को सहकारी संरचना के अंतर्गत लाकर “सहकार से समृद्धि” की भावना को मूर्त रूप देंगे ।
इस अवसर पर ,SPCDF के मध्य प्रदेश स्टेट कोऑर्डिनेटर संदीप मिश्रा, अवशीतन केंद्र प्रभारी चिराग गुप्ता, तरुण जागिड़ सहकारी सेवा प्रभारी जीवन जी ठाकुर, वीरेंद्र पानू आदि लोग उपस्थित रहे।

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