करेरा। ग्राम बिलहरी खुर्द में भागवताचार्य पण्डित महेश कुमार पाण्डेय के निवास पर ब्राह्मण समाज के तत्वावधान में बाल्मीकी जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई जिसमें सभी समाज के लोग उपस्थित हुए एवं महर्षि बाल्मिकी जी महाराज का विधि विधान से पूजन अर्चन कर आरती की गई।

भागवताचार्य पण्डित महेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि बाल्मिकी जी ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुए थे महर्षि कश्यप एवं माता अदिति के नौवे पुत्र वरुण ( आदित्य) जिनका एक नाम प्रचेत भी है।

प्रचेत की धर्म पत्नी चर्षणी के गर्भ से बाल्मिकी जी का जन्म हुआ था जिनका बचपन में रत्नाकर नाम रखा था सूतिका ग्रह से भीलों ने इनको चुरा लिया था भीलों के यहां पालन पोषण हुआ और भीलों के सानिध्य में रहकर वह चोरी करने लगे।

देवर्षि नारद का सानिध्य प्राप्त होने से बाल्मीकी जी महाराज का जीवन परिवर्तन हुआ देव ऋषि नारद जी ने वाल्मीकि जी को राम नाम का मंत्र दिया वाल्मीकि जी महाराज राम राम को भी उल्टा मरा मरा जपने लगे
उल्टा नाम जपा जग जाना , बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना ।।
अंत में वाल्मीकि जी को ब्रह्म की उपाधि प्राप्त हुई दीर्घकाल तक कठिन तप करने के कारण उनके आसपास वाल्मीकि यानी मिट्टी का ढेर लग गया इसी कारण से इनका नाम वाल्मीकी पड़ा बाल्मिकी जी महाराज ने संस्कृत में रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की
बाल्मिकी जयंती में सर्व श्री श्रीनिवास शास्त्री , पं॰ श्री मातादीन मिश्रा, आदित्य पाण्डेय, प्रहलाद पाण्डेय , रवि दुवे, जाहर सिंह यादव , त्रिपाल यादव , रामकुमार श्रीवास्तव , देवेन्द्र प्रजापति, हेमू विश्वकर्मा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
