करैरा में पौधारोपण के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार , नर्सरी में रोपित सिर्फ कागजी पेड़

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करैरा। करैरा वन मंडल के अंतर्गत उकायला परिक्षेत्र में स्थित नया खेरा बीट की नर्सरी कक्ष क्रमांक आरएफ 438, रकवा 50 हेक्टेयर में वर्ष 2023-24 के दौरान 25,000 पौधों के रोपण का दावा किया गया था। लेकिन मौके पर स्थिति इसके ठीक विपरीत है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के अनुसार, नर्सरी में लगाए गए पौधों की संख्या दावे की 20% से भी कम है, यानी लगभग 2,500 पौधे भी मौजूद नहीं हैं। नर्सरी में पौधारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन न तो पौधों की देखरेख की गई और न ही पानी की व्यवस्था।

ग्रामीणों का आरोप है कि जो पेड़ नर्सरी में दिख रहे हैं, वे पुराने हैं, और नए पौधों का कोई अता-पता नहीं है। नर्सरी को केवल दिखावे के लिए सड़क की ओर से कवर किया गया है, ताकि दूर से देखने वालों को यह भव्य नर्सरी लगे। लेकिन पास जाकर निरीक्षण करने पर सच्चाई सामने आती है कि यहाँ भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें हैं। ग्रामीणों ने तत्कालीन वन विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिनके सहयोग के बिना इतने बड़े पैमाने पर यह ठगी संभव नहीं थी।

नर्सरी की बाउंड्री: कागजों में ऊँची, हकीकत में टूटी-फूटी

नर्सरी की सुरक्षा के लिए चारों ओर 5 फीट ऊँची और डेढ़ फीट चौड़ी बाउंड्री बनाए जाने का प्रावधान था। लेकिन मौके पर बाउंड्री की स्थिति दयनीय है। कहीं-कहीं बाउंड्री की ऊँचाई मात्र 2 फीट है, तो कहीं यह इतनी संकरी है कि उसका कोई औचित्य ही नहीं रह जाता। कई स्थानों पर बाउंड्री पूरी तरह से अनुपस्थित है। इस कमी के चलते नर्सरी में पशुओं और बाहरी लोगों का आवागमन बेरोकटोक है, जिसके कारण पौधों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाउंड्री के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई। कागजों में मोटी राशि खर्च दिखाई गई, लेकिन हकीकत में काम आधा-अधूरा और गुणवत्ताहीन है। यह स्थिति न केवल नर्सरी की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किस तरह से किया गया। बाउंड्री के निर्माण में गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी ने नर्सरी को असुरक्षित बना दिया है, जिसके चलते पौधों का विकास और संरक्षण लगभग असंभव हो गया है।

देखरेख के अभाव में सूख रहे है नर्सरी के पौधे

नर्सरी में पौधारोपण के बाद उनकी देखरेख के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। न तो सिंचाई की कोई सुविधा थी और न ही नियमित रखरखाव। ग्रामीणों के अनुसार, पौधों को पानी तक नहीं दिया गया, जिसके कारण ज्यादातर पौधे सूख गए। नर्सरी को केवल एक गार्ड के भरोसे छोड़ दिया गया, जो 50 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र की देखभाल के लिए नाकाफी है। ग्रामीणों ने बताया कि नर्सरी में नए पौधों के बजाय पुराने पेड़ों को ही गिन लिया गया है, और जो नए पौधे लगाए गए थे, उनकी देखरेख के अभाव में वे नष्ट हो गए। नर्सरी में लगाए जाने वाले पौधों में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल प्रजातियों का चयन किया जाना चाहिए था, जैसे नीम, शीशम, बबूल, अमलतास, और पीपल। ये प्रजातियाँ न केवल तेजी से बढ़ती हैं, बल्कि कम पानी और देखरेख में भी फलती-फूलती हैं। इसके अलावा, औषधीय और फलदार पौधों जैसे आँवला, बेल, और जामुन को भी शामिल किया जा सकता था, जो स्थानीय लोगों के लिए भी लाभकारी होते। लेकिन नर्सरी में न तो प्रजातियों का चयन सोच-समझकर किया गया और न ही उनकी देखभाल, जिसके कारण यह परियोजना पूरी तरह विफल रही।

यह नर्सरी है या भ्रष्टाचार का अड्डा ग्रामीणों ने की जाँच की माँग

नया खेरा बीट की नर्सरी में हुए इस कथित भ्रष्टाचार ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने माँग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो नर्सरी आज हरी-भरी होती। इसके बजाय, यहाँ केवल कागजी आँकड़ों का खेल खेला गया। नर्सरी को सड़क के किनारे से सजावटी रूप देने का प्रयास तो किया गया, लेकिन इसका मकसद केवल लोगों की आँखों में धूल झोंकना था। ग्रामीणों का कहना है कि इस नर्सरी में लगाए गए पौधों की संख्या और खर्चे गए धन का कोई हिसाब-किताब नहीं है। वन विभाग के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा गहन छानबीन की आवश्यकता है। साथ ही, भविष्य में ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को शामिल करने और नियमित निगरानी की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और पौधारोपण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएँ वास्तव में पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें। नर्सरी में पौधारोपण के नाम पर हुआ यह कथित घोटाला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लापरवाही को भी दर्शाता है। उचित प्रजातियों के चयन, नियमित देखरेख, और मजबूत बाउंड्री की कमी ने इस परियोजना को विफल कर दिया। ग्रामीणों की शिकायतें और मौके की स्थिति इस बात की पुष्टि करती हैं कि नर्सरी में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। इस मामले में जाँच और कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी परियोजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।

इनका कहना है ।

(1) समय समय पर पौधों की गिनती होती रहती है अगर ऐसा हो तो दिखवा लेते है उचित समय पर गिनती होगी तो हम भी देखेंगे एवं रही बाउंड्री की बात तो 2 वर्ष पहले की बात है उस समय जैसा भी हुआ था । लेकिन फिर भी जहाँ कमी होगी वहाँ हम सुधारेंगे ।

लक्षमण सिंह मीणा रेंजर करैरा

(2) कहीं बार पौधों की ग्रोथ कम रहती है । वहा रिप्लेसमेंट हुआ होगा, लेकिन फिर भी आप बता रहे हो अगर ऐसा है तो एक बार दिखवा लेते है ।

सुधांशु यादव डीएफओ शिवपुरी

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