करेरा। शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर स्थानीय साहित्यकारों ने कवि गोष्ठी का आयोजन किया I गोष्ठी की अध्यक्षता की वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सा डॉ राजेंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में दतिया से पधारे साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राज गोस्वामी एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ कवि डॉक्टर ओमप्रकाश दुबे जी उपस्थित रहे । अतिथि महानुभावों ने सर्वप्रथम मां सरस्वती का पूजन किया उसके पश्चात अतिथियों एवं कवियों का पुष्पहार से स्वागत किया गया और मां सरस्वती की वंदना सुमधुर स्वर में डॉ राज गोस्वामी द्वारा बुंदेली भाषा में की गई –
तो खौं नमन शारदा मैया
दै दै मोय ज्ञान की पोथी
चलै ज्ञान को पहिया ,
तो खौं नमन शारदा मैया I
उसके पश्चात सेवानिवृत शिक्षक रमेश बाजपेई एवं प्रभु दयाल शर्मा जी का शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर सम्मान किया ।
कवि गोष्ठी में प्रथम कवि के रूप में रमेश बाजपेई जी द्वारा आंख पर बहुत ही श्रेष्ठ रचना पढी वानगी देखें –
आंखें जाता देती हैं
तुम खुश हो या हो अवसाद में ,
आंखें जब दो से चार होती हैं
तो जिंदगी होती है वाद विवाद में I तत्पश्चात काव्य पाठ किया डॉक्टर ओमप्रकाश दुबे जी ने उन्होंने किसान की अवस्था पर आधारित श्रेष्ठ रचना पढी –
जब किसान का पसीना
हरी हरी फसलों में बदल जाता है ,
तो वह अपने बैलों को चूमता है I सेवानिवृत शिक्षक राष्ट्रवादी कवि प्रभु दयाल शर्मा जी ने बुंदेली में अपनी कविता पढ़ी जिसे खूब सराही गई –
मूफईं गोड़न जावै भौजी
लएं हाथ में कुदरा जी ,
खूब बरस रहे बदरा जी I
तत्पश्चात प्रमोद गुप्ता भारती ने अपने अंदाज में रचना पढ़ी जिसे सभी ने सराहा –
आज कहा मुझे नदिया के
बहते धारों ने ,
मुझको सागर तक पहुंचाया
इन्हीं किनारों ने I
मुख्य अतिथि की आसंदी से डॉ राज गोस्वामी जी दतिया द्वारा बुंदेली में काव्य पाठ किया जिससे सभी आनंद विभोर हो उठे –
की के घरै बैठवे जाएं
की खौं घरै बुलाएं ,
की की का का कहैं काऊ सें
कछुअई कह नईं पाएं I
अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए डॉ राजेंद्र गुप्ता ने श्रृंगार रस में काव्य पाठ किया –
आज भी तू मेरे ख्वाबों में चली जाती है, दिल ए दरिया में उतरती ही चली जाती है I
जिस पर खूब तालियां बजीं I
गोष्ठी का सफल एवं श्रेष्ठ संचालन प्रमोद गुप्ता भारती ने किया और आभार प्रदर्शन का दायित्व रमेश बाजपेई द्वारा निभाया गया ।
