तेरह साल से गणपति की झांकिया लगा लगा रहे तीन भाई बहिन,बदलते है थीम ,देते है विभिन्न संदेश

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करेरा। पूरा देश गणपति की भक्ति में डूबा है,जगह जगह गणपति के पंडाल सजे है, ऐसे में ही करेरा के तीन भाई बहिन प्रतिदिन गणपति का अलग अलग श्रंगार कर लोगो को अनेक संदेश भी दे रहे है। तेरह साल से गणपति की झांकी लगाने बाले यह बच्चे हर साल थीम भी बदलते है।

घर के अंदर विराजे यह गणपति,कभी तिरंगा रूप में दिखते है,तो कभी भगवा रूप में,भगवान शिव और काल भैरव का रूप भी इन्होंने लिया है,यानी हर दिन एक नए रूप में इन गणपति की झांकी देखने को मिलती है,और इस झांकी को सजाते है तीन भाई बहिन अपासी तालमेल से,न किसी से कोई चंदा न कोई पांडाल,लेकिन झांकी के माध्यम से विभिन्न संदेश सबको देते है। इस झांकी की शुरुआत 13 साल पहले पुलकित शर्मा ने अपने दादा जी स्वर्गीय श्री सिद्धेश्वर शर्मा के साथ की थी,जिसे आज भी वह अपने भाई यशवर्धन और हिमानी के साथ जारी रखे हुए है,हर साल नई थीम लेते है,पहले वह कोरोना,चंद्रयान, अनेक थीम ले चुके है,इस साल की थीम माता पिता ही भगवान है रखी गई है इज़के पीछे पुलकित शर्मा कहते है कि आजकल माता पिता का सम्मान घरों में काम होता जा रहा है,बृद्ध आश्रम के संख्या बढ़ रही है, गणपति ने माता पिता को सर्वोपरि माना इस लिए इस साल की थीम में माता पिता हो महत्व दिया गया है


तीन भाई बहिनों के द्वारा सजाई जाने बाली गणपति की यह झांकी,केवल ईश्वरीय आस्था तक सीमित नही बल्कि इस झांकी में बहुत संदेश है यहां विभिन्न तरह के स्लोगन लिखे गए है,जो समाज को संदेश देते है।यहां रोजाना एक सुविचार भी लिखा जाता है,साथ ही गणपति झांकी में कागज की लिखी हुई विभिन्न पर्चियां लटकी नजर आती है जिनमे देश की तमाम समस्याए लिखी है जो गणपति जी को समर्पित है,झांकी में सहयोग करने बाली पुलकित की बहिन और दादी मैं भी इससे बहुत खुश नजर आती है
गणेश भगवान को बुद्धि का दाता कहा जाता है,शायद यही कारण है कि बुद्धि के दाता की झांकी लगाने की शुरुआत पुलकित ने उस समय कर दी थी जब वह 4 साल के थे,इज़के बाद अपने छोटे भाई बहिन को भी उन्होंने इस पुनीत कार्य मे जोड़ लिया,आज उनकी झांकी की जो सन्देश देती है वह बड़े बड़े पंडाल की झांकिया नही दे पाती है।

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