◆कमलेश कमल की शब्द संधान पुस्तक की समीक्षा
भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के बतौर अधिकारी पदस्थ कमलेश कमल की नई पुस्तक शब्द संधान की मुकेश कुमार शर्मा (गृह मंत्रालय के अंतर्गत राजभाषा से सम्बद्ध) ने समीक्षा की समीक्षक में लिखा है,भाषा केवल विचारों की अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि संवेदना, संस्कृति और समय की सजीव चेतना भी है। इसी चेतना को स्पर्श करती है हिंदी के चर्चित लेखक, भाषाविद् और व्युत्पत्तिशास्त्री कमलेश कमल की नवीनतम और चर्चित कृति ‘शब्द-संधान’, जो प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।
यह पुस्तक शब्दों के उद्गम, उनकी यात्रा, अर्थ विस्तार और समय के साथ उनके व्यावहारिक रूपांतरण की खोज है। कमलेश कमल ने विशुद्ध भाषावैज्ञानिक दृष्टिकोण को लोकप्रिय शैली में ढालते हुए यह सिद्ध कर दिया है कि जटिलतम भाषिक विषयवस्तु भी सामान्य पाठक तक प्रभावी रूप से पहुँचाई जा सकती है।


‘शब्द-संधान’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल भाषाविदों या शोधार्थियों की रुचि की पुस्तक नहीं है, बल्कि आम हिंदी प्रेमियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, प्रशासकों और पत्रकारों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। पुस्तक में प्रयुक्त उदाहरण हमारे दैनिक जीवन से लिए गए हैं, जिनके माध्यम से लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि कैसे शब्दों के प्रयोग में सूक्ष्म अंतर भी अर्थ का पूरी तरह परिवर्तन कर सकता है।
पुस्तक तीन खण्डों में विभाजित है। प्रथम खण्ड में 100 छोटे-छोटे अध्याय हैं, जिनमें शब्दों की व्युत्पत्ति, पर्याय, अर्थपरक विभेद, अंग्रेज़ी पर्याय इत्यादि को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। दूसरे खण्ड में 07 अध्याय हैं, जिनमें शब्दों की तहों को खोलते हुए लेखक ने यह दिखाया है कि भाषा कैसे अच्छी और प्रांजल हो सकती है। तीसरे और अंतिम खण्ड में पर्यायवाची, विलोम, श्रुतिसमभिन्नार्थक इत्यादि शब्दों का वृहद् संकलन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में शब्दों की व्युत्पत्ति, प्रयोग और भावार्थ को एक साथ समेटते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि भाषा में शब्द का चुनाव केवल व्याकरण की दृष्टि से नहीं, भाव की गरिमा को ध्यान में रखते हुए भी किया जाना चाहिए।
प्रशंसनीय यह भी है कि कमलेश कमल ने अपने लेखन में न तो संस्कृतनिष्ठ शुद्धतावाद की कट्टरता अपनाई है और न ही आधुनिक भाषिक विकृतियों को स्वीकार किया है। वे भाषिक समृद्धि के पक्षधर हैं, जहाँ भाषा दूसरी भाषाओं और लोक से भी जुड़ी रहे और शुद्धता तथा व्याकरणिक मानकों की गरिमा भी बनाए रखे। यही विरल संयोग ‘शब्द-संधान’ को समकालीन भाषिक विमर्श में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।
प्रकाशन की दृष्टि से पुस्तक का मुद्रण, आवरण और संयोजन अत्यंत स्तरीय है। प्रभात प्रकाशन ने एक गंभीर विषय को जनसुलभ बनाने वाले लेखक के इस प्रयास को उचित गरिमा प्रदान की है। संक्षेप में कहा जाए तो ‘शब्द-संधान’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भाषिक सामर्थ्य को बढ़ाने वाली बहुमूल्य कृति है। 300 पृष्ठों की यह कृति हर उस पाठक को पढ़नी चाहिए जो शब्दों से सरोकार रखता है—चाहे वह लेखक हो, विद्यार्थी हो, शिक्षक हो या सामान्य पाठक
◆कमलेश कमल जी के बारे में

★ हिंदी के चर्चित वैयाकरण, भाषा-विज्ञानी एवं लेखक
भारतीय शिक्षा बोर्ड के भाषा सलाहकार
भारत सरकार के हिंदी के विभिन्न शब्दकोशों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका
★ सम्मान व उपलब्धियाँ
टायकून इंटरनेशनल द्वारा देश के 25 चर्चित ब्यूरोक्रेट्स में शामिल
‘गोस्वामी तुलसीदास सम्मान’ (2023)
‘विष्णु प्रभाकर राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ (2023)
★ लेखन व शोध
विश्व के सबसे बड़े समाचार पत्र दैनिक जागरण में ‘भाषा की पाठशाला’ नामक स्थायी स्तंभ
DD National पर हर बुद्धवार हिंदी-पाठशाला नाम से show आरंभ हुआ है।
विगत 15 वर्षों से शब्दों की व्युत्पत्ति एवं शुद्ध प्रयोग पर सतत लेखन
2000+ आलेख, कविताएँ, कहानियाँ, संपादकीय, आवरण कथाएँ व समीक्षाएँ प्रकाशित
अंग्रेज़ी में भी समानांतर लेखन
★ प्रमुख #1 बेस्टसेलर पुस्तकें
भाषा संशय-शोधन (भाषा सुधार हेतु गृह मंत्रालय द्वारा अनुशंसित पुस्तक)
शब्द-संधान (शब्द-व्युत्पत्ति एवं व्याकरण)
ऑपरेशन बस्तर: प्रेम और जंग (उपन्यास)
★ अकादमिक व शिक्षण कार्य
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य परीक्षा हेतु हिंदी व निबंध की नि:शुल्क कक्षाएँ
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, भारतीय जनसंचार संस्थान सहित अनेक विश्वविद्यालयों में ‘भाषा-संवाद: कमलेश कमल के साथ’ कार्यक्रम का संचालन
★ अन्य दायित्व
विभिन्न भाषा एवं साहित्य संस्थानों में महत्त्वपूर्ण भूमिका
पत्र-पत्रिकाओं में संपादकीय अनुभव
आईटीबीपी में जन संपर्क अधिकारी एवं प्रकाशन प्रमुख (UPSC: 2007)
★ डिजिटल उपस्थिति
फेसबुक पेज ‘कमल की कलम’ (6-7 लाख मासिक पाठक)
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